एहसास

किसी के न होने का एहसास सभी को होता है

मौजूदगी किसी किसी को ही नज़र आती है

मुड़ मुड़ कर आती है जाने वाले की यादें

तन्हाइयों में अक्सर आंखें छलक जाती हैं


याद जब आती है उसकी दिल हो जाता है उदास

महसूस होता है जैसे वो यहीं कहीं है आस पास 

लुका छुपी का खेल खेल रहा हो जैसे जान बूझ कर

करवा रहा हो जैसे अपने पास कहीं होने का एहसास


जिधर भी देखें उसका अक्स नज़र आता है

स्पर्श करना चाहूँ तो गायब हो जाता है

दिल से एक पल नहीं हटती उसकी यादें

कभी हवा कभी खुश्बू बन कर हर पल याद आता है


क्यों आदमी आदमी को नहीं पहचानता

पास रहते हुए भी एक दूसरे को नहीं जानता

क्यों कोई याद करता है मर जाने के बाद ही

उम्र गुज़री जिनके साये में उनको भी नहीं मानता


रवींद्र कुमार शर्मा

घुमारवीं

जिला बिलासपुर हि प्र