कर्णधार

तुम सूर्य से तेजवान

तुम चंदा से शीतल हो

फूलों सी मुस्कान लिये।

तुम धरती पर बोझ नहीं। 

तुम हो विपदा में कर्णधार।

तुम भारत भूमी का गौरव हो। 

भारत मां का अभिमान बनों। 

भारत भूमी की शान बढ़ा विश्व 

में भारत का जय गान करो। तुम 

मान हो तुम्ही शान हो तुम्हीं तो हो

अभिमान देश का। तुम वीर हो इस 

भूमी के भारत का कल्याण करो।

माता-पिता की सेवा। बड़ों का मान 

और गुरुजनों का सम्मान करो।जग

में रोशन अपना नाम करो। 


 रमा निगम वरिष्ठ साहित्यकार

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