मानव जीवन के उसूल

उसूलों पर टिकी यह ज़िंदगी,

ख़ुदा की नेमत और बन्दगी।

बिन उसूल जैसे ढाक के तीन पात,

उसूल है जन्नत उसूल भगाये रिंदगी।


इज़्ज़त दिलाता है उसूल,

जीवन को राह दिखाता है उसूल।

उसूल के पक्के लोग मंज़िल हैं पाते,

कामयाब बनाता है उसूल।


मानव,पशु -पक्षी या प्रकृति,

सब पर होती उसूलों की परिधि

उसूल के दायरों में बंधकर ही,

सबने यह दुनियां है जीती।


कामयाबी अगर चाहते हो तुम,

उसूल के पक्के बन जाओ।

तजकर बुरी आदतों को,

कर्तव्यपथ पर बढ़ जाओ।


               रीमा सिन्हा

              लखनऊ-उत्तर प्रदेश