"एक तस्वीर ये भी"

यह भी एक तस्वीर है मेरे देश की

चेहरे पर मैल की गहरी पर्त,,,,

 गालों पर उभरेआंसुओं के निशान लिए ,,

कचरे के ढेर में से ,,,

रोटियां खोजता बचपन !!


 यह भी तस्वीर है मेरे देश की 

दिवाली पर जले हुए पटाखों में से,,, 

 कुछ अधजली चकरी पटाखों को

खोजता-बीनता बचपन !!


ये भी तस्वीर है मेरे आधुनिक देश की

कड़ाके की ठंड में तन ढकने की

जद्दोजहद करता हुआ, अंगीठी के पास 

रात गुजारता बचपन !!


ये भी तस्वीर है मेरे देश की

हवेलियों में कतारबद्ध खडीं कारों 

तो कभी सड़क खड़े वाहनों के शीशे

चमकाता बचपन !!


तस्वीर अभी और भी हैं किन्तु होगा क्या??

कौन समझेगा और कौन सुझाएगा,,,

ठंडे बस्ते पड़ीं योजनाओं को मुंह चिढातीं 

फाइलें और उन फाइलों के ऊपर जमी

धूल को झाड़ता बचपन !!!!!!


रश्मि मिश्रा  'रश्मि'

भोपाल (मध्यप्रदेश )