वह चौबीस के लिए

संविधान ही नहीं सभी "उपदेश" कोड़ने वाला है।

"वह" चौबीस के लिए शिगूफा नया छोड़ने वाला है।


देशभक्ति की जो परिभाषा घूम घूम वह बांच रहा,

उस परिभाषा में हमीद भी देश तोड़ने वाला है।


कौन मरेगा इससे उसको फर्क नहीं पड़ता वह तो,

ज़हर निगलने वाले के घर

जहर उगलने वाला है।


उसका बाजा, उसके गायक, उसके नर्तक बोल रहे,

जो हम बोले उसको ही कल देश बोलने वाला है।


उसे पता है उसकी हरकत पंचों की नज़रों में है,

इसीलिए अब वह पंचों पर  खेल खेलने वाला है।


भैया और बिहारी कहकर हमको लतियाने वालों,

यह भी बोलो की यह रावण किससे लड़ने वाला है।


धरती से आकाश तलक जो कुछ है सब उसका है,

वह गढ़ता है सबको पर यह उसको गढ़ने वाला है।


धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव

सम्पादक

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