करो नमन किसान को

करो नमन उस किसान को

 जो नींद छोड़ चार बजे जग जाता

चाय मिले या न मिले

जल्दी से खेत पर पहुंच जाता

सारी हवाओं को झेलता रहा

बारिश को वह झेलता रहा

बस एक ही उद्देश्य है उसका

उसे अन्न है बस उगाना

कर्तव्य है बस

सब को रोटी खिलाना

जैसे सैनिक देश का रखवाला है

 किसान सबका पेट पालने वाला है

किसी के पास कितना भी

चाहे  पैसा क्यों न हो

वह पैसा कभी नहीं खा सकता

ईश्वर ने पेट बनाया है

और पेट तो रोटी ही मांगता है

किसान पसीना बहाता है

और कष्टों को चुपचाप सह लेता है

दिन हो या रात उसे तो सिर्फ

मेहनत ही बस करना है

लोग किसान को कम

अधिकारी को ज्यादा समझते हैं

लेकिन उनको नहीं पता कि

वे यह गलती करते हैं

किसान तो छोटा बड़ा कोई

भी क्यों न हो

सभी के लिए अन्न उगाता है

किसान को सम्मान

हमेशा देना ही चाहिए

किसान का कभी

अपमान नहीं होना चाहिए

करो नमन उस किसान को

जो नींद छोड़ चार बजे जग जाता है

रितु शर्मा

दिल्ली