तीनों कृषि कानूनों की वापसी से भड़कीं कंगना रनौत, बोलीं-‘दुखद, शर्मनाक और बिल्कुल गलत’

आज पीएम ने तीनों किसान बिल वापस लेने का फैसला लिया है। पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश में तीनों बिल वापस लेने की बात कही है। आज इस फैसले के बाद से ही हर तरफ से लोगों की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं हैं। फिल्म जगत से भी कई सेलेब्स ने अपनी राय सोशल मीडिया पर रखी है लेकिन कंगना रनौत इस फैसले पर भड़की हुई नजर आ रही हैं। कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ”दुखद, शर्मनाक और बिल्कुल गलत, यदि लोगों ने सड़क पर आकर कानून बनाना शुरू कर दिया न कि संसद में चुनी हुई सरकार ने तो यह एक जिहादी नेशन है जो इस तरह का देश चाहते हैं 

उन्हें बधाई।”तापसी पन्नू इस कानून के रद्द करने के पक्ष में थीं। उन्होंने इस कानून के रद्द के होने के बाद ट्विटर पर सभी को गुरुपूर्णिमा की बधाई दी। वही सोनू सूद ने भी ट्वीटर पर ट्वीट करके पीएम के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने लिखा,”ये आश्चर्यजनक खबर है! धन्यवाद पीएम मोदी कृषि कानून बिल वापस लेने के लिए। धन्यवाद किसानों का जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन किया। ऋचा चड्ढा ने भी कई सारे किसान बिल कानून के रद्द से जुड़े ट्वीट को रिट्वीट किया। एक और ट्वीट में ऋचा एक ग्रीन टीशर्ट वाली फोटो शेयर की जिसमे किसान की फोटो दिख रही है। और कैप्शन लिखा सरबत दा भला।  

हिमांशी खुराना ने इंस्टाग्राम पर पॉट करते हुए लिखा कि आखिरकार जीत अपनी हुई, सारे किसान लोगों को बहुत बहुत बधाई। गुरुनानक देव जी के प्रकाश पर्व का बड़ा तोहफा। हैप्पी गुरुपर्व। बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि आज मैं आपको, पूरे देश को, ये बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस महीने के अंत में शुरू होने जा रहे संसद सत्र में, हम इन तीनों कृषि कानूनों को रिपील करने की संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा कर देंगे। सरकार ने किसानों के लिए कई प्रयास किए हैं।

 प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश के छोटे किसानों की चुनौतियों को दूर करने के लिए, हमने बीज, बीमा, बाजार और बचत, इन सभी पर चौतरफा काम किया।सरकार ने अच्छी क्वालिटी के बीज के साथ ही किसानों को नीम कोटेड यूरिया, सॉयल हेल्थ कार्ड, माइक्रो इरिगेशन जैसी सुविधाओं से भी जोड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज ही सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़ा एक और अहम फैसला लिया है। जीरो बजट खेती यानि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए, देश की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर क्रॉप पैटर्न को वैज्ञानिक तरीके से बदलने के लिए।