किसान आंदोलन

वासर रैना जो करें परिश्रम,

सबके लिए है अन्न उगाते।

उनको मिले नहीं मेहनताना,

खाली पेट वही रह जाते ।।


प्रथम पहर में संग परिवार के,

हल कांधे रख चला किसान।

सर्दी गर्मी बरसा  को सहता ,

व्यक्तित्व है भई बड़ा महान।।


निकल पड़ा है लिए हौसला,

पाने को अपना वह अधिकार।

एक पल न अब पीछे हटेंगे,

किसान आंदोलन की सुनो पुकार।।


है मेरे भी बीवी और बच्चे,

उनकी और भी देखो एक बार ।

दर्द मुझे भी होता लोगों ,

हृदय से निकली सुनो पुकार।।


अपना अधिकार लेने को आये,

आँखों में कई स्वप्न सजाए ।

किसान अपनी पीड़ा को दिखाए,

शासन अब तो अधिकार दिलाए।।


किसान आंदोलन नहीं रुकेगा,

जब तक साँसों में है साँस ।

डग भर न अब पीछे हटेंगे,

बहुत लगाई है हमने आस।।


गीता देवी

औरैया उत्तर प्रदेश

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