प्राइवेट स्कूल कर रहें मनमानी, आरटीई के तहत साढ़े 5 हजार बच्चों को नहीं मिला दाखिला

लखनऊ। जिले के प्राइवेट स्कूल निशुल्क शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों का दाखिला देने के लिए तैयार नहीं है। लखनऊ में ऐसे 25 स्कूल है जो मनमाने तरीके से स्कूल चला रहें है। यहां तक कि बीएसए से लेकर शासन तक की फटकार के बाद भी स्कूलों के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। वहीं, स्कूल संचालको का कहना है कि पिछले कई साल से सरकार की तरफ से अभी तक इन बच्चों का फीस नहीं दिया गया है। बता दें कि लखनऊ में माइनॉरिटी स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो लगभग 500 ऐसे स्कूल हैं जो निशुल्क शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत आते है। 4 फेज में हुई लॉटरी के अनुसार, 11500 ऐसे विद्यार्थी है जो आरटीई अंतर्गत मिले हैं। हालांकि इनमें से केवल 7 हजार बच्चों को ही स्कूलों में दाखिला मिला है और 5 हजार 500 बच्चों को किसी भी स्कूल में दाखिला नहीं मिला है। वहीं, बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह ने संयुक्त शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर इन सभी स्कूलों की एनओसी रद्द करने की मांग की है। पायनियर मांटेसरी स्कूल, सेंट जोसेफ स्कूल, राज कुमार एकेडमी (मेंहदीगंज, आलमनगर), संस्कार पब्लिक स्कूल (इंदिरा नगर), शिशु विद्यापीठ (सआदतगंज), सनशाइन पब्लिक स्कूल (कश्मीरी मोहल्ला), न्यू पब्लिक स्कूल (पवनपुरी), सेंट हेनरी इंटर व कॉलेज (खदरा), ब्राइट लैंड इंटर कॉलेज (त्रिवेणी नगर, अलीगंज), सिटी मांटेसरी स्कूल, डायमंड पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल (चिनहट), लॉर्ड मेहर स्कूल (इंदिरानगर), माउंट मैरी इंटर कॉलेज (गोलागंज), न्यू एरा गर्ल्स इंटर कॉलेज (मोहिबुल्लापुर), लखनऊ पब्लिक स्कूल (राजाजीपुरम, अम्रपाली योजना), बेबी मार्टिन इंटर कॉलेज (तहसीनगंज), सेंट एग्निस पब्लिक स्कूल (राजाजीपुरम), माउंट मैरी इंटर कॉलेज (खुर्रम नगर, कल्याणपुर), विज्ञान मांटेसरी स्कूल (कैंपवेल रोड), ग्रीन वैली स्कूल (मकबूल गंज), गुरुकुल एकेडमी (इंदिरा नगर), हैप्पी आवर्स (सराय माली खान), बाल विद्या मंदिर (चारबाग) समेत कुछ अन्य स्कूल शामिल हैं।