कोविड-19 महामारी से प्रभावित बच्चों को हुई शिक्षण हानि से निपटने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सार्वभौमिक पहुंच प्रदान करना ज़रूरी

गोंदिया - कोविड-19 महामारी ने पूरे विश्व सहित भारत में भी हर क्षेत्र के साथ-साथ शिक्षण क्षेत्र में भी भारी नुकसान पहुंचाया है जिसके कारण अभी भी छोटे बच्चों के स्कूल कई राज्यों में बंद हैं तथा उन्हें ऑनलाइन शिक्षण दिया जा रहा है जिससे बच्चों और उनके अभिभावकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि अनेक बच्चों के पास मोबाइल नहीं है अगर है भी तो सादी है व्हाट्सएप वाली नहीं है। कभी नेटवर्क का प्रॉब्लम कभी रिचार्ज का प्रॉब्लम कभी स्कूल फ़ीस का प्रॉब्लम हो जाने से बच्चों को जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना चाहिए उसमें कहीं ना कहीं अधूरेपन का भाव दिख रहा है जिसका खामियाजा हमें भविष्य में भुगतना पड़ सकता है क्योंकि यह बच्चे ही हमारे देश का भविष्य हैं।

 साथियों बात अगर हम निजी और सरकारी स्कूलों की करें तो हम खुद संज्ञान लेकर देख सकते हैं कि निजी और सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता क्या है यह बात किसी से छिपी नहीं है। ऊपर से कोविड-19 महामारी का गतिरोध है। इसलिए बच्चों की बुनियादी शिक्षा  पर सरकारों को ध्यान केंद्रित करते हुए सरकारी स्कूलों को जीवंत संस्थानों में परिवर्तन करना अब समय की मांग है। जिसके लिए रणनीतिक रोडमैप बनाना ज़रूरी है। इसीलिए हमें दिनांक 23 नवंबर 2021 को भारत और विश्वबैंक तथा आंध्रप्रदेश के पांच लाख़ से अधिक छात्रों के शिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए ऋण समझौते से प्रेरित होकर सभी कोविड तथा शिक्षण बाधा से पीड़ित सभी राज्यों द्वारा इस प्रकार के समझौते का संज्ञान लेकर आवश्यकता अनुसार विचार किया जा सकता है। 

साथियों बात अगर हम दिनांक 23 नवंबर 2021 को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी पीआईबी की करें तो उसके अनुसार, आंध्रप्रदेश राज्य ने एक नया योग्यता - आधारित शिक्षण दृष्टिकोण अपनाया है। इस परियोजना से कक्षा-आधारित परामर्श, सभी ग्रेड और विषयों के शिक्षकों के लिए जरूरतआधारित शिक्षकप्रशिक्षण व्‍यक्तिगत अनुकूली शिक्षण (पीएएल) विधियों और मानकीकृत स्कूल-आधारित आकलन से जुड़ी उपचारात्मक शिक्षा के अन्य रूपों के माध्यम से शिक्षण प्रक्रियाओं में सुधार आएगा। 

भारत सरकार, आंध्र प्रदेश सरकार और विश्व बैंक ने 18 नवम्‍बर, 2021 को एक परियोजना के बारे में 250 मिलियन डॉलर के कानूनी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना का उद्देश्य आंध्र प्रदेश राज्य में 50 लाख सेअधिक छात्रों की शिक्षण गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। इस परियोजना से स्कूली शिक्षा के सभी ग्रेड और चरणों के छात्रों को लाभ होगा। इस योजना से 45, हज़ार से अधिक सरकारी स्कूलों के लगभग 40 लाख छात्र (छह और चौदह वर्ष की आयु के बीच), और आंगनबाड़ियों (एकीकृत बाल विकास केन्‍द्रों) में नामांकित 10 लाख से अधिक बच्‍चे (तीन और छह वर्ष की आयु के बीच) तथा लगभग एक लाख नबे हज़ार शिक्षक और 50 हज़ार से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लाभान्वित होंगे।

सपोर्टिंग आंध्राज लर्निंग ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट से शिक्षकों का पेशेवर विकास प्रोत्साहित होगा और इससे कोविड-19 महामारी से प्रभावित बच्चों के लिए उपचारात्मक शिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्‍ध होगा, इसके अलावा विशेष ज़रूरत वाले बच्‍चों, अनुसूचित जनजातियों और लड़कियों सहित सीमांत समूहों के छात्रों पर विशेष ध्‍यान देने में मदद मिलेगी। इन सेवाओं को प्रदान करने के लिए स्कूलों की संस्थागत क्षमता का विकास करना समुदाय के विश्वास के निर्माण और शिक्षण के माहौल में सुधार करने में एक लंबा रास्ता तय करेगा। यह परियोजना स्कूल सुविधाओं के बेहतर रखरखाव, स्कूल प्रबंधन और निगरानी में माता-पिता की भागीदारी में सहायता प्रदान करने, डेटा उपलब्ध कराने और स्कूल की सुरक्षा बढ़ाने में भी योगदान देगी। 

चल रही कोविड-19 महामारी के कारण, छात्रों के लिए घर में शिक्षा ग्रहण करने के अवसर प्रदान करना राज्‍य की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल हैं। छात्रों में डिजिटल उपकरणों की कम उपलब्धता को देखते हुए, टेलीविजन और रेडियो प्रसारण के लिए भौतिक शिक्षण किट और विषय सामग्री विकसित करने पर भी ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। इससे मौजूदा महामारी, भविष्य की प्राकृतिक आपदाओं या जलवायु परिवर्तन से संबंधित अन्य व्यवधानों से स्कूल बंद होने के कारण बच्चों की होने वाले शिक्षण हानि को भी कम करने में मदद मिलेगी।

 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और प्रारंभिक ग्रेड (ग्रेड 1 और 2) शिक्षकों के लिए अल्पकालिक सेवाकालीन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और इन केन्‍द्रों और स्कूलों में शिक्षण के लिए उपयुक्त शिक्षण सामग्री (टीएलएम) की आपूर्ति के माध्यम से बुनियादी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। इससे बुनियादी शिक्षा पर इस तरह ध्यान देने से बच्चों को भविष्य के श्रम बाजारों के लिए आवश्यक संज्ञानात्मक सामाजिक-व्यवहार और भाषा कौशल के साथ तैयार करने के बारे में स्कूलों के कार्य में सुधार आएगा। 

यह परियोजना जनजातीय ब्लॉकों के 3,500 स्कूलों में एक वर्षीय प्री-स्कूल स्तर का पाठ्यक्रम शुरू करेगी, जिससे जनजातीय समुदाय के बच्‍चों के सीखने के कम स्तर के मुद्दे को हल करने में मददमिलेगी। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सार्वभौमिक पहुंच प्रदान करना भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास का केन्‍द्र है। यह परियोजना आंध्र प्रदेश राज्य के कोविड-19 महामारी से प्रभावित बच्चों को हुई शिक्षण हानि से निपटने सहित बच्चों की बुनियादी शिक्षा पर ध्‍यान केन्द्रित करते हुए सरकारी स्‍कूलों को जीवंत संस्‍थानों में परिवर्तित करने के विजन को पूरा करने में भी मदद करेगी। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि कोविड-19 महामारी से प्रभावित बच्चों को हुई शिक्षण हानि से निपटने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सर्वभौमिक पहुंच प्रदान करना ज़रूरी है तथाभारत विश्वबैंक और आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा 50 लाख से अधिक छात्रों के शिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए यह ऋण समझौते का संज्ञानः सभी राज्यों द्वारा आवश्यकतानुसार लेने पर विचार किया जाना चाहिए। 

 -संकलनकर्ता-कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र