अंतरात्मा की आवाज, अंतर्मन

जब भी होती हूँ अकेली,

चुपके से एक आवाज़ आती है

और मुझे झकझोर जाती है

वो है मेरी अंतरात्मा की आवाज़!!


कभी यूँ महसूस होता है मुझपर

असीम अनुकम्पा है ईश्वर की,

सही, गलत को परिलक्षित कर

अंतरात्मा से संदेश प्रेषित करता है!!


जादुई ज्ञान है अंतरात्मा का,

सच्चा सुख मिल जाएगा जब,

सही राह दिखलाएगी ये आवाज़

ये है अंतरात्मा की आवाज़ !!


व्यस्त जीवन मे मेरे तूफानी मन की,

खामोश सी बस्ती अंतर्मन में है

जब तूफान उठता है, इस अंतर्मन में,

सुनामी सैलाब ले आती है आंखों में !!!


स्वरचित

भगवती सक्सेना गौड़

बंगलोर