अधूरे खिस्से

अधूरे खिस्सों की पूरी 

कहानी अबकी सुनो तुम 

मेरी ज़ुबानी मैं कई कई 

सदी अपने सपनों को 

बुनी हूँ ख़ुद से बिछड़कर 

मैं खुद से मिली हूँ वैसे तो 

उमर कुछ खास नही

पर जीवन की है बड़ी 

लम्बी कहानी,अबकी 

सुनो तुम मेरी ज़ुबानी।

वो एक पल जिसमें 

सदियां निहित हैं,

वो आँखों का दरिया 

जिसमे आँसू की नदियां 

निहित हैं,वो दर्द के किस्से 

वो दर्द की कहानी,

अबकी सुनो तुम मेरी ज़ुबानी।

वो आँखों मे काजल 

वो आशाओं का पानी,

वो मिलना बिछड़ना,

अमावस की रानी,

अबकी सुनो तुम मेरी ज़ुबानी।


डिम्पल राकेश तिवारी

अय्योध्या-उत्तर प्रदेश