उजाले की तलाश

 दिल की लगी से,

दिल टूटा सा है।

मुकद्दर मेरा मुझसे,

कुछ रुठा सा है।

मुहब्बत जब तुलने लगे

तो हर एतबार

लगे झूठा सा है।

हम तो राहो पे,

इन्तजार की लकीरें,

खींचते ही रहे।

न‌ उन्हे वक्त न‌ कदर,

मुहब्बत के पौधे को,

हम सींचते ही रहे।।

इश्क के समुन्दर मे,

था सब छलावा,

बस हमे लूटा सा है।

मुहब्बत जब तुलने लगे

तो हर एतबार

लगे झूठा सा है।

अन्धेरो की गर्दिश मे,

हम उजाले को,

तलाशते ही रहे।

तू हो न हो राह तेरी हम,

निहारते ही रहे।

डोर मुहब्बत की,

कमजोर ही थी,

साथ तेरा छूटा सा है।

मुहब्बत जब तुलने लगे

तो हर एतबार लगे झूठा सा है।


चारु मित्तल

मथुरा-उ०प्र०