॥ आ जाने दो देश में स्वराज ॥

शिक्षादीप से दीप जलाओ

मिट जाये तम का साम्राज्य

बंद करो बेवकूफ बनाने की नीति

आ जाने दो देश में अब स्वराज


सोने की बालियाँ खेत में उगाओ

भूखा ना रोये पड़ोसी भी आज

बुजुर्गों का भी मान सम्मान बढ़ाओं

आ जाने दो देश में अब स्वराज


राजनीति से कचड़ा को हटाओ

जन्मदाता को भी दो अधिकार

आ जाये हिन्दुस्तान में राम राज्य

आ जाने दो देश में अब स्वराज


देवी को देवी की नजर से देखो

माँ बहनों को दे दो सम्मान

ना लुटे किसी नारी की अस्मत

आ जाने दो देश में अब स्वराज


मूर्ख बनाने की नीति को अलविदा

सब को समझो अपना ही समाज

अन्त करो गन्दी राजनीति की पॉलिसी

आ जाने दो अब देश में स्वराज


इन्सान हो इन्सान को समझो

क्यों बनते हो तुम सब यमराज

बंद हो ये बेवकूफ बनाने की नाटक

आ जाने दो अब देश में स्वराज


प्रेम की बगिया से गुलशन को सजाओ

विकास की दीप प्रज्वलित हो आज

भाईवाद की बंद हो राजनीति

आ जाने दो अब देश में स्वराज


त्रस्त हो चुकी बहुत अब जनता

अब और ना करो इन्हें बरवाद

अविरल बहने दो पावन गंगा

आ जाने दो देश में अब स्वराज


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार