॥ आतंकी की कोई जाति नहीं ॥

आंतकी की कोई जाति नहीं

आतंकी  से कोई बात नहीं

जो भी है आतंकी के पैरोकार

भेज दो उन्हें भी जहन्नुम के द्वार


आतंकी किसी का रिश्तेदार नहीं

आतंकी को किसी से प्यार नहीं

आतंकी है दुश्मन मानव का यार

भेज दो उन्हें जहन्नुम के  द्वार


आतंकी किसी का दर्द ना सुनता

भारतीय को सदा वो दुःख ही देता

आतंकी पाकिस्तान की है सेवादार

भेज दो उनको जहन्नुम के  द्वार


आतंकी जग का है एक यमराज

पाकिस्तान का है जो भी हमराज

इनके आने का करो इन्तजार

भेज दो इनको अब जहन्नुम के द्वार


आतंक का आका जो भी नजर आये

आतंक पर भाषण दे मुस्कुराये

उन्हें भी रेखाकिंत करो इसबार

भेज दो उनको भी जहन्नुम के द्वार


जो आतंकी को घर में छुपाये

बाँध उन्हें चौक पर सजा दिलायें

जो बनते है इनका खिदमत कार

भेज दो उनको भी जहन्नुम के द्वार


उदय किशोर साह

मो० पौ० जयपुर जिला बाँका बिहार