घट घट के वासी

शब्द नहीं तुम्हें कहने को

भाव नहीं तुम्हें दिखाने को

तुम तो हो अंतर्यामी

हम तो हैं तुम पर 

समर्पित हो मेरे को।

आपने ही हमें कर्म दिया

आपने ही हमें धर्म दिया

आप ही ने कर्तव्य बताया

आप ही ने जीवनदान दिया।

अविवेकी को विवेक देकर

अज्ञानी को ज्ञान देकर

प्राणी को माया देकर

आप ही ने संसार में 

चक्रव्यूह चलाया।

हमारी तो मंजिल भी आप

मंजिल को पाने की राह भी 

आप फिर क्यों?

हमें संसार की भूल भुलैया 

में डाल दिया।

आप में ही है वास सबका

अल्लाह, ईश्वर कहें या 

राम रहीम फिर क्यों 

मानव में यह भेद बनाया

जानते हैं आप में है हम

और हममें हैं आप,

तो करो सत्य और 

शांति की स्थापना आप

तभी तो होगी आपकी 

और हमारी जीत

हां, प्रभू मानवता की जीत।


डॉ जानकी झा

कटक, ओडिशा