हम पूजा करेंगे शक्ति की

सर्व मंगल मंगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्येत्रयंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

 हमारे देश की सनातनी संस्कृति में हरेक ऋतु का अपना महत्व हैं और उसी का दर्शन हमे उत्सवों में दिखाई देता हैं।अब श्राद्ध में अपने पितृओं के प्रति श्रद्धांजलि दे ,हम पूजा करेंगे शक्ति की जिनकी उपासना से हमे शांति मिलती हैं।ये वो शक्तियां हैं जिन्होंने दैत्यों को मार कर दुनियां में शांति और सुरक्षा की स्थापना की थी।सभी शक्ति पीठों के साथ साथ सभी देवी मंदिरों में खास पूजा अर्चना कर मातारानी की आराधना की जाती हैं।धार्मिक वातावरण में उनकी स्तुति की जाती हैं,जिसमे चंडी पाठ या देवीकवच,दुर्गाचालिसा, विंध्याचल चालीसा ,और कई दूसरे पाठों और श्लोकों का पाठ किया जाता हैं जिससे मातारानी प्रसन्न हो जाए और जग के दुःख दूर करे ,हमारी जगतजननी मां।

पूरे देश में भक्तजन ज्वारे बोते हैं,कुंभ का स्थापन करते हैं, घरके देवस्थान को फूलों से सजाते हैं।रोज मातारानी को प्रसाद चढ़ा, पाठ पूजा करते हैं।नौ दिनों तक पूरे देश में एक पवित्र वातावरण छा जाता हैं। जहां देखो वहां मातारानी की भेंटे सुनाई देती हैं,बहुत श्रद्धा से उनका गुणगान गाया जाता हैं,अपने  मन के भावों की कीर्तन द्वारा अभिव्यक्ति कर भक्तजन मातारानी को रिजातें हैं।

  गुजरात में भी सभी प्रांतों की तरह मातारानी की आराधना होती हैं किंतु रास– गरबा खेलना यहां की परंपरा थोड़ी अलग ही हैं।पुराने जमाने में गली– मोहल्लों में बीच में मातारानी का मंदिर जिसे –गरबी– कहते हैं, उसीकी स्थापना कर , गरबी के आसपास बड़ा सा गोल घेरा बनाकर नृत्य रूप में गरबे करते हैं, जो माताजी की आभाओं वर्णन करते गरबों के ताल पर जो जोश के साथ नृत्य करते हैं वह अवर्णनीय हैं।युवान और युवतियां तो रात भर गरबा खेलते हैं।बाद में मातारानी की आरती कर प्रसाद आवंटित किया जाता हैं।

अब कुछ सालों से गरबों का व्यवसायिकारण होने की वजह से क्लबों में या पार्टी प्लॉटों में भी आयोजित होते रहे  हैं जो बहुत बड़े पैमाने में ,सुनियोजित तरीके से होते हैं और वहां शुल्क देके ही दाखिला मिलता हैं।या क्लब में सभ्य होने वालों को ही प्रवेश मिलता हैं।

 पौराणिक कथा के अनुसार मां जगदम्बा का प्रगटय होने के पीछे भी एक कारण था। महिषासुर नमक दैत्य ने मेरु पर्वत पर जा ब्रह्माजी को अपनी तपस्या से प्रसन्न कर एक वर प्राप्त किया था जिससे उसे कोई पुरुष नहीं मार सकता तो वह अमर हो गया वैसा सोच पृथ्वी पर कोहराम मचाया और स्वर्ग में भी अपना राज्य स्थापित करने हेतु आक्रमण कर अपना राज्य स्थापित करना चाहता था ।जब सब देवता इंद्र के पास पहुंचे तो इस दैत्य को मारने के लिए मां जगदम्बा का प्रागट्य हुआ।और सभी स्तुतियों में कई दैत्यों को महाशक्ति द्वारे मारे जाने की बात बताई गई हैं। वही नौ देवियों की पूजा आराधना कर हम उनकी सदियों से पूजा करतें हैं और करते रहेंगे।

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद