फिसलती दुनिया।

क्यों करते-करते भी विकास देश

पिछङता ही जा रहा है।

लोग पढ -लिख तो रहे हैं

पर विचारों से तुच्छ हैं आज भी।

नहीं है कोई लङकी आज

सुरक्षित अपने ही घरों में

रोज सुनाई देती हैं हमें

दर्दनाक खबरें अखबारों में।

फिसलते जा रहे हैं लोग

भावनाओं की सीढियों से।

विकास होता दिख रहा है 

पर है सोच तुच्छ आज भी।

क्यों फिसलती जा रही है दुनिया

क्यों फैल रहा चारों तरफ अँधेरा।।


परिचय - नीतू कुमारी/मनीराम

छात्रा रामकुमारी कॉलेज मुकुंदगढ़

मु.पो.कसेरू झुंझुनू, राजस्थान।





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