राम से बली राम का नाम

राम तुम्हारी धरा पे देखो

कैसी रार मचाई है,

नाम तुम्हारा ही लेने पर

देते लोग दुहाई हैं,

राम बिना इस भरतभूमि का,

क्या इतिहास दिखाओगे?

रामनाम पर प्रश्न उठाते 

प्रश्न स्वयं बन जाओगे!

वश में अगर तुम्हारे होता 

जेब में रख लेते सबको।

स्वार्थपूर्ति का मार्ग बनाते,

यीशु, ईश्वर और रब को

आत्महनन कर डाला तुमने,

निज आत्मा को मार दिया।

रामनाम के मंत्र को तुमने

वोटनीति स्वीकार किया।

शर्म जरा भी ना आती,

कैसे इतना गिर जाते हो?

कैसे कबीर , गाँधी का प्यारा

रामनाम ठुकराते हो?

मत भूलो रावण से ज्यादा,

शक्ति नहीं, ना साहस है।

राम के मर्म को भूल के क्यों

कर डाला ये दुस्साहस है?

भरते जाते हो अनीति की

गागर किस झूठे भ्रम में? 

राम बिना यह सृष्टि नहीं

रघुनाथ बसे तुममें-हममें।

अब भी ना तुम चेत सके

तो भुगतोगे परिणाम।

याद रखो  है राम से ज्यादा,

बली राम का नाम।। 

 ©डॉ0श्वेता सिंह गौर