"अहिंसा परमो धर्म"

लखीमपुर खीरी में घटी घटना से साबित होता कि इंसान की जान कितनी सस्ती बन गई है, लोग गुस्से में आकर कितना अनर्थ कर देते है। छोटी-मोटी बात पर हिंसक हो जाते है, और एक दूसरे की जान के प्यासे बन जाते है। पर कभी सोचा है ऐसी घटनाओं में जो बलि चढ़ जाता है उनका एक परिवार भी होता है। कोई किसी माँ बाप का इकलौता बेटा होता है, किसीका सुहाग तो किसीका पिता होता है। उस परिवार का सहारा छीन जाता है। आख़िर क्या मिलता है ऐसी मानसिकता से।  

अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम्‌। दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम्‌॥

तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहोनातिमानिता। भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत॥

इसका मतलब है, हे भरतवंशी अहिंसा, सत्यं, क्रोध न करना शान्ति व शरीर, मन व मष्तिक की शुद्धता जीवों के प्रति दया भाव, मन, वचन व कर्मो से किसी को क्षति ना पहुँचाना। अपनी समस्त इन्द्रियों को अपने वश मे रखना किसी भी कार्य के प्रति पूर्णतः समर्पित होना। तेज, क्षमा, धैर्यं व किसी से भी शत्रुता न रखना तथा सम्मान का मोह ना होना व अपमान का भय ना होना ये सभी लक्षणं देवतुल्य मनुष्यों मे विद्यमान होते है।

पर मौजूदा दौर में इंसानोंकी सोच राक्षसों वाली बनती जा रही है।

हड़ताल, आंदोलन, विद्रोह, हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं। नुकसान किसीके परिवार का है, समाज का है और देश का है। इंसान की मानसिकता और सोच इतनी उग्र होती जा रही है की हर बात पर खून खराबे पर उतर आते है। कृषि कानूनों और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी की टिप्पणी का विरोध कर रहे किसानों और मंत्री के बेटे के बीच रविवार को हिंसक टकराव में आठ लोगों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश में बवाल मचा हुआ है।

लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के बाद तमाम विपक्षी दल उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला जिन्होंने ट्वीट कर उत्तर प्रदेश को नया जम्मू कश्मीर बता दिया है, शायद सच कहा है। अगर यही हाल रहा तो पूरा देश कश्मीर बन जाएगा। देश में ऐसी हिंसा और अराजकता को अंजाम देकर अशांति फैलाने वालों को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए। क्यूँ इतने समय से चल रहे किसान आंदोलन का सरकार कोई निराकरण नहीं लाती, जबकि देश के हर मुद्दों में ये मुद्दा अहम् है। किसानों की मांग पर विचार करके इस आंदोलन का समाधान लाना चाहिए।

रविवार को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य तय कार्यक्रम के तहत लखीमपुर खीरी के दौरे पर थे। उन्हें रिसीव करने के लिए गाड़ियां जा रही थीं। ये गाड़ियां केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की बताई गईं। रास्ते में तिकुनिया इलाके में किसानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे झड़प हो गई। बाद में ऐसा आरोप लगाया गया कि आशीष मिश्रा ने किसानों के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी, जिससे 4 लोगों की मौत हो गई। किसानों की मौत के बाद मामला बढ़ गया और हिंसा भड़क गई और हिंसा में बीजेपी नेता के ड्राइवर समेत चार लोगों की मौत हो गई। कुल मिलाकर इस हिंसा में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। इन लोगों की मौत का ज़िम्मेदार कौन? इनके परिवार वालों की क्या गलती?

अपने ऊपर लगे इन आरोपों को केंद्रीय मंत्री और उनके बेटे ने खारिज कर दिया है। केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा ने कहा कि कुछ लोगों ने काफिले पर हमला कर दिया था, जिससे ड्राइवर घायल हो गया। उन्होंने कहा कि हमारे तीन कार्यकर्ता और एक ड्राइवर की मौत हो गई है और गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया गया है। उनका कहना है कि वो भी इस मामले में केस दर्ज करवाएंगे।

वहीं, उनके बेटे आशीष मिश्रा ने दावा करते हुए कहा कि वो सुबह 9 बजे से बनवानीपुर में थे। उन्होंने कहा, हमारी 3 गाड़ियां एक कार्यक्रम के लिए उप-मुख्यमंत्री की अगवानी करने गई थीं, रास्ते में कुछ बदमाशों ने पथराव किया, कारों में आग लगा दी और हमारे 3-4 कार्यकर्ताओं को लाठी से पीटा। सच क्या है, झूठ क्या है इसकी जड़ तक पहुँच कर इस हिंसा की न्यायिक जांच होनी चाहिए। 

किसान संगठन इस हिंसा के लिए सांसद पुत्र मोनू को जिम्मेदार ठहरा रहे है, तो वहीं केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने अराजकतत्वों द्वारा पथराव किए जाने से गाड़ी के अनियंत्रित होने से हादसा होने की बात कही है। इससे घटना की शुरुआत के असल कारणों को लेकर बड़ा सवाल बना हुआ है, जिससे भड़की हिंसा ने आठ जिंदगियां निगल लीं।

इस घटना के बाद सी एम. योगी आदित्य नाथ ने ट्वीट करते हुए कहा कि लखीमपुर खीरी में हुई ये घटना दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है, इसमें जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पर सी एम. और सरकार से निवेदन है की ऐसी घटनाएं घटने से पहले मुद्दों को सुलझा लिया जाए ताकि देश में शांति बनी रहे।

भावना ठाकर 'भावु' (बेंगुलूरु, कर्नाटक)