लेखक जब कलम उठाता

लेखक क्या नहीं कर सकता

ये दुनिया सब जानती है।।

अरे चला दे लेखन जरा कलम

शब्दों की धार काटना जानती है।।

सच कविता परिवर्तन लाती है।।

राजनीति हो या कुछ ओर सही

कटु अक्षरों की मार रुह तक जाती है

छू जाते जब किसी के मान को शब्द

तब इंसानी तन भूचाल लाती है।।

सच कविता परिवर्तन लाती है।।

हमेशा कटु नहीं नम्र शब्द भी

दिल में सबके प्रेम जगाती है

दिल में जहर हो जिसके 

उसके दिल में प्रेम नदी समाती है।।

कविता परिवर्तन लाती है।।

पत्थर को तोड़ पिघलाती है

नदियों की धार मोड़ जाती है

अल्प राग दिल में समाती है

कविता परिवर्तन लाती है।।२।।


वीना आडवानी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र