स्नेह तुम्हे आमंत्रण

अम्बर आँचल से उदित अर्क

हर्षित उजास करता अर्पण

बिखराता नव जीवन प्रकाश

देता नित नेह निमंत्रण।

हिमगिरी के हिमशिखरों को

कानन -करील -कुंजन वन को

मुग्ध -मलय मरूत के संग

करता नित सौम्य समर्पण!!

कल -कल सी कलरव की धुन

पपिहा,कोकिल निरझर रुनझुन

पुलकित,पलवित हो प्रसून,आह!

भरते नित उर आकर्षण।

अति कोमल कामिनी  सुषमा

शीतल -शीतल देती ऊष्मा

दे दिया हाय!व्याकुल हो मन

अब स्नेह तुम्हें आमंत्रण।


नीरजा बसंती

गोरखपुर-उत्तर प्रदेश