"मेरा चांद भी तुझ से कम नहीं"

ऐ चांद। ना इतना इतराओ,

मेरा चांद भी तुझ से कम नहीं। 

तुझसे रौशन है जग सारा ,

उससे रौशन मेरा घर आंगन।

ऐ चांद! ना इतना इतराओ ,

मेरा चांद भी तुझ से कम नहीं ।

तेरी रश्मि सुनहरी अति स्वर्णिम,

उसका मुख चंद्र भी तुमसा है ।

तुमसे है यह दुनिया जगमग ,

उससे जगमग मेरा जीवन ।

ऐ चांद!  ना इतना इतराओ

मेरा चांद भी तुझ से कम नहीं ।

तुम दुग्ध धवल हो अति शीतल, 

उसका मन निर्मल गंगा जल । 

तुझसे शीतल दुनिया सारी ,

उससे शीतल मेरा अंतर्मन ।

ऐ चांद ! ना इतना इतराओ,

मेरा चांद  भी तुझ से कम नहीं ।

तुझसे है नूर विभावरी का,

वह मेरी मांग सजाता है ।

तुम हो उपमा सुंदरता की,

 वह सुंदर सुरभित है उपवन ।

ऐ‌ चांद! ‌ना इतना इतराओ ,

 मेरा चांद  भी तुझसे कम नहीं ।

तेरा रूप अनूप अपरमित  है ,

वह प्रेम सुधापूरित अम्बर ।

तेरी छवि  से है जग आलौकित,

वह प्रेम सुधा बरसाता है।

ऐ चांद! ना इतना इतना इतराओ,

मेरा चांद भी तुझ से कम नहीं ।

करवा के दिन ही  देखो ना

 तुम दोनों पूजे जाते हो

तुम दोनों से सौभाग्य मेरा

तुम दोनों मान बढ़ाते हो।

ऐ चांद ! ना इतना इतराओ,

मेरा चांद  भी तुझ से कम नहीं। 

है आज यही तुझसे विनती,

अमर मेरा सौभाग्य रहे ।

 हो हाथों में उनके हाथ मेरा,

 जब तक गंगा की धार रहे।

ऐ चांद! ना इतना इतराओ,

मेरा चांद भी तुझसे कम नहीं ।


स्वरचित मौलिक--

मधुलिका राय "मल्लिका"

 गाजीपुर उत्तर प्रदेश

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