आवरण

मन को तन का सुंदर आवरण चाहिए,

जीने को प्यार का वातावरण चाहिए।

सांसो को शुद्ध पर्यावरण साथ चाहिए,

चांद सूरज तारों की हसीन बारात चाहिए।

गमो   को खुशी का वातावरण चाहिए,

दुखी दिल को सांत्वना के मीठे बोल चाहिए।

जिंदगी जीने को एक मुलाकात चाहिए,

साथी हो कोई प्यारा प्यार भरा साथ चाहिए।

भाव लिखने को सुंदर उदगार चाहिए,

शब्दों में तारतम्यय का साथ चाहिए।

चोट जब मन पर लगी हो मीठी वाणी चाहिए,

तन की चोट को औषधि का उपचार चाहिए।

पंच तत्वों से बना शरीर जीने का सार चाहिए,

जिंदगी जीने को घर परिवार समाज चाहिए।

पर्यावरण स्वच्छ बनाने को पौधे लगाने चाहिए,

जल जीवन है जल को अब बचाना चाहिए।

काम क्रोध मद लोभ से सदा बचना चाहिए,

जीवन में संयम का साथ हरदम चाहिए।

,नियत ने बदले देखकर कभी पराया धन,

बस  इन्द्रियों पर नियंत्रण चाहिए।

जिंदगी जीने को एक आवरण चाहिए,

बस मुलाकातों का दौर खत्म ना हो।

जीवन में सुंदर वातावरण चाहिए।।

हम तुम हंसते रहे सदा ईश से वरदान चाहिए।।


                    रचनाकार ✍️

                    मधु अरोरा