कांटे भी कह जाते हैँ

प्रकृति ने कुछ भी

व्यर्थ नहीं बनाया

प्रकृति के कण-कण ने

हमें कुछ न कुछ सिखाया

गुलाबों को खिलते हुए

खूब मैंने देखा है

गुलाबों को महकते हुए

हाँ मैंने देखा है

कैसे रहते हैं

वे कांटो के बीच

सदा हंसने की देते

रहते हैँ वे सीख

गुलाबों से भी कहीं ज्यादा

काँटों ने हमें है सिखाया

जो हमें महक देते हैं

जो मन की प्रसन्नता देते हैं

उनकी हमेशा हिफाजत करें

उनको हमेशा सलामत रखें

स्वभाव कांटो का कैसा भी हो

रूप कांटो का कैसा भी हो

बहुत बड़ी सीख दे जाते हैं

मानवता का पाठ पढ़ाते हैँ

मानव मानव के लिए जीले

कांटे भी यह कह जाते हैं

रितु शर्मा

दिल्ली