॥ कलियुग का हो रहा विकास ॥

उस जुल्म सितम का करो प्रतिकार

जो मानव हित में ना हो करो वहिष्कार

उस आततायी अन्यायी का करो अन्त

जो मानव का दुश्मन बन है जग में खड़ा


ये जग था शांति का कभी वन उपवन

पर कुछ राक्षस ने है अतिक्रमण किया

जग में अन्याय अत्याचार करने का है

इस शदी में बृहत व्यापार है किया


कभी यह धरती थी देवों की भूमि

कण कण में साधु संत करते थे वास

वन उपवन में तप कर  तपस्वी गण

करते थे जग का कल्याण  विकास


पर क्या हो रहा है इस युग में ओ प्रभु

कलियुग का जब से हुआ है अवतार

हर घर में कलह और झंझट का मंजर का

आगाज से हो रहा है बरबाद परिवार


जग में महाभारत आज भी दीख रहा है

जब अपनों में स्वार्थ लोभ का प्रयास हुआ

सहन शक्ति हर शख्स में अब लुप्त हुआ

तामसी लोभी कलियुग का हो रहा है विकास


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088