नहीं निकाला गया चुप ताजिए का जुलूस , सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

लखनऊ। पैगंबरे इस्लाम मोहम्मद साहब के नवासे और हजरत अली के पुत्र हजरत इमाम हुसैन आ0स0 की याद में हर वर्ष लखनऊ में 68 दिनों तक मनाया जाने वाला मोहर्रम आज संपन्न हो गया। गम के आखरी दिन 8 रबीउल अव्वल की सुबह पुराने लखनऊ के नाजिम साहब के इमामबाड़े से निकाले जाने वाला चुप ताजिए का जुलूस कोविड-19 गाईड लाइन के तहत इस बार भी नहीं निकाला गया। नाजिम साहब के इमाम बाड़े में मौलाना यासूब अब्बास ने सुबह के समय मजलिस पढ़ी। रबी उल अव्वल के महीने की 8 तारीख को 11वें इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम की शहादत के मौके पर आज खदरा स्थित गार वाली कर्बला में गमजदा आजादारो ने 11वें इमाम की शहादत का गम मनाया। सुबह करीब 7 बजे गार वाली कर्बला में मौलाना तकी रजा ने मजलिस पड़ी इसके उपरांत 11वें इमाम के चाहने वालों ने कर्बला के अंदर ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए जुलूस निकाला और मातम कर अपने इमाम को पुरसा दिया । आपको बता दें कि मोहर्रम की 1 तारीख से लेकर रबी उल अव्वल की 8 तारीख तक शिया समुदाय के द्वारा हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की कर्बला में हुई शहादत का गम मनाते हैं इस दौरान इमाम हुसैन के चाहने वाले अपने घरों में मजलिसो के साथ दीने इस्लाम के लिए अपनी शहादत देने वाले हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके 72 साथियों के शहादत के गम में जुलूस भी निकालते हैं लेकिन साल 2020 से कोई भी जुलूस नहीं निकाला गया । आपको बता दे कि 30 जनवरी 2020 को भारत में कोरोना वायरस का पहला मरीज मिला था। 25 मार्च 2020 से 68 दिनों के लिए पूरे भारत में लॉकडाउन लागू किया गया था तब से लेकर आज तक धार्मिक जुलूस और बड़े आयोजन पर लगाई गई पाबंदी अभी भी जारी है जिसकी वजह से लगातार दो वर्षों से शिया और सुन्नी समुदाय की तरफ से किसी भी जुलूस का लखनऊ में आयोजन नहीं किया गया है। 68 दिनों तक हजरत इमाम हुसैन की याद में मनाए जाने वाले गम के दिन 8 रबीउल अव्वल की शाम ढलते ही समाप्त हो जाते है । आपको बता दें कि 12 रबी उल अव्वल को लखनऊ में जुलूस ए मदहे सहाबा और जुलूस ए मोहम्मद का भी सुन्नी समुदाय की तरफ से भव्य तरीके से किया जाता था लेकिन गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी कोविड-19 गाईड लाइन के अनुसार कोई भी जुलूस नहीं निकाला जाएगा। पुराने लखनऊ में शिया सुन्नी समुदाय के सभी कार्यक्रमो को सरकारी गाईड लाइन के तहत शांतिपूर्ण माहौल में सकुशल सम्पन्न कराने के लिए पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने सुरक्षा के पुख्ता इंतिजाम कर लिए है। पुराने लखनऊ के संवेदनशील क्षेत्रो में भारी संख्या में पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है और पुलिस के आला अफसर लगातार निगरानी भी कर रहे है।