बढ़ते रहो, गड़ते रहो

वर्तमान में अपना नाम 

पुण्य कर्म संग बनाना है

इतिहास में लोग याद रखें

सबके दिल में सम्मान पाना है।।


बढ़ते चलो, गड़ते चलो पुण्य कर्म

यही दुनिया को समझाना है।।


देख रहा वो ऊपर वाला तुमको

वही देख जब खुश हो जाता है।।

भर देता जीवन खुशियों से वो

वही कर्म अनुसार नाम दिलाता है।।


बढ़ते चलो, गड़ते चलो पुण्य कर्म

यही दुनिया को समझाना है।।


नाम सदैव उसी का गाया जाता युगों तक

जो दूसरों की खुशी में सदैव मुस्काता है।।

कलयुग में भी चला जो मिल सभी संग

जाना वही विजय पताका सच लहराता है


बढ़ते चलो, गड़ते चलो पुण्य कर्म

यही दुनिया को समझाना है।।


 पढ़ो इतिहास के कुछ पन्नों को जो संग नहीं

पर नाम आज भी उनका गाया जाता है।।

कारण, वो जिये दुनिया की खुशियों के लिए

उनके किये सत्यकर्म को पुस्तकों से

आज पढाया जाता है।।


बढ़ते चलो, गड़ते चलो पुण्य कर्म

यही दुनिया को समझाना है।।


आया था खाली हाथ

 जाएगा खाली हाथ

 ये मुहावरा गलत कर जाना है।।

आया था खाली हाथ

जा रहा सम्मान, प्रेम से झोली भर

यही मुहावरा खुद के कर्म से बनाना 

है।।


वीना आडवानी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र