कचरा पेटी

बच्चों को डिब्बाबंद दूध पैक्ड आहार मजबूरी 

परेशानी या हो नौकरी पर जाने वाली हैरानी।

झट घोला पट पिलाओ तुरंत खिलाओ। प्राकृतिक 

तरीके से प्राप्त दूध और ताजे फल सब्जियों से प्राप्त 

सूप हों या जूस हो या हो पतली खिचड़ी अथवा दाल 

का पानी अपने मासूम को दिजिये भरपूर पोषण से युक्त 

पोष्टिक आहार।रिश्ता हमारा पेट से है कचरा पेटी से नहीं। 


किशोर हों या हों युवा बर्गर पिज्ज़ा चिप्स नमकीन संग

कोल्डड्रिंक की बोतल ।यह नहीं हैं आदर्श खान-पान यह

सब तो हैं बिमारियों की दुकान। ग्रहण करें घर का बना 

भोजन और हमेशा अपनी स्मृति में रखें सादा भोजन

उच्च विचार यही तो है स्वस्थ जीवन का आधार। यहां 

हमारा रिश्ता अपने पेट से कचरा पेटी से नहीं। पेट को 

पेट ही रहने दिजिये कचरा पेटी ना बनाईये। 


 बुजुर्ग हो गये हो या खड़े हो बुजुर्गयीत की कगार पर

अथवा उल्टी गिनती गिन रहे हो ।जबान की गुलामी छोड़

मन को काबू में कर जितना शरीर को भाये और पेट को ना 

रुलाये उतना ही अन्न ग्रहण करें। खाने का मोह और लालच

का बंधन छोड़ परमात्मा से बंधन बांधने का यत्न करें। इस बात

को अपनी स्मृति में सदा रखें "बुलाती है लेकिन जाने का नहीं"। 

अपने पेट से वास्ता रखये कचरा पेटी से नहीं। 


रमा निगम वरिष्ठ साहित्यकार 

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