साझा करना और देख़भाल करना

साझा करना और देख़भाल करना 

भारतीय दर्शन के मूल तत्व हैं 

भारतीय संस्कृति में इनका महत्व है 

युवाओं में इस मंत्र की अति ज़रूरत है 


साझा करने से समस्या का हल निकलता है 

मन का बोझ हल्का होता है 

साझा करने की प्रवृत्ति में सरलता है 

ख़ुदकुशी के बचाव में मिलती सफ़लता है 


ख़ुद परिवार और बुजुर्गों की 

देख़भाल करना भी अत्यंत ज़रूरी है 

डिजिटल उपकरणों में दिनभर खोए रहना 

रिश्तो में होती असहनीय दूरी है 


साझा करना देखभाल करना 

दोनों बहुत जीवन में ज़रूरी है 

दोनों से रचनात्मकता और मौलिक सोच 

भारतीय संस्कृति कूट-कूट कर भरी है 


-लेखक कर विशेषज्ञ,साहित्यकार,कानूनी लेखक,चिंतक कवि,एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र