टीस सी दिल मे चुभती है

लड़ियां टूटी माला बिखरी,

पीर सी दिल मे दुखती है।

जाने वाले चले गये,

टीस सी‌ दिल मे चुभती है।

कुछ ग्रास बने कोरोना का,

कुछ को बीमारियों ने छीना।

तड़प उठता है मन,

छलनी सा होता है सीना।

बोझ कलेजे पे उठाये,

यादें न दिल से मिटती है।

जाने वाले चले गये,

टीस सी‌ दिल मे चुभती है।

पल-पल साथ निभा गये,

वो दोस्त थे दिल के करीब।

सब अपनी दुनिया में गुम,

पर दिल का इक कोना रहे गरीब।

आंखें ढूंढती अपनो को,

निद्रा से जब वो जगती है।

जाने वाले चले गये,

टीस सी‌ दिल मे चुभती है।

जाने वालो से मिलने का,

इक रास्ता तो बन जाये।

हकीकत मे न हो रुबरु,

ख्वाबों मे राब्ता बन जाये।

हंसते खेलते वजूद की,

सांसे ही क्यूं रुकती है।

जाने वाले चले गये,

टीस सी दिल मे चुभती है।

 चारू मित्तल 

मथुरा-उ०प्र०