( शिव संकल्प )

शिव संकल्प यानी किसी भी योजना के लिए शिद्दत और द्रढ़ मनोबल से लिया हुआ संकल्प। जीवन में अगर कुछ पाना चाहते हो तो संकल्प को द्रढ़ बनाओ।

यजुर्वेद में मन को शुभ संकल्पों से युक्त करने की महत्वाकांक्षा बहुत ही काव्यमयी और सुगम तरीके से अभिव्यक्त हुई है। यहां मन की महिमा का विशद और सूक्ष्म विवेचन है। यजुर्वेद के 34 वें अध्याय में मन को शुभ संकल्पों से युक्त बनाने की प्रार्थना ‘शिव संकल्पसूक्त’ के रूप में दर्शायी गई है।

सकारात्मक मानसिकता सभर दिमाग वाले लोग जो संकल्प करके ताउम्र ज़िंदगी के हर रंग में ढ़ल जाते है। वही असली योद्धा है। खुद पर कमान मजबूत शख़्सीयत की नींव होती है, शांत मन इंसान की दक्षता और कुनेह का प्रमाण है। हर परिस्थिति में हड़बड़ाने की बजाय मन को स्थिर रखकर निर्णय करें और संकल्प करें की इस परिस्थिति से लड़कर उभरना है।

जब किसीकी गलत बात या गलत विषय वस्तु पर आप निरर्थक दिमाग नहीं चलाते तो अपनी ज़िंदगी की दिशा निर्देश की कमान भी किसी और के हाथों में मत दो। विरोध करना भी एक हुनर है सिख जाओ। ना कहना गलत नहीं जिस बात को करने की अनुमति अपना मन और हृदय ना दें वो करने की जुर्रत मूर्खता है, कमज़ोरी है और डर का दूसरा नाम है। 

मन को अपने काबू में रखकर संकल्प लें की ज़िंदगी की जंग का, चुनौतियों का हौसलों के साथ लड़ते हुए सामना करेंगे। संघर्ष ज़िंदगी का दूसरा नाम है। तो सकारात्मक सोच से लिया संकल्प शिव संकल्प कहलाता है। डरो नहीं, रुको नहीं, झुको नहीं हिम्मत से हर कदम उठाते आगे बढ़कर खुद को प्रस्थापित करो। भावनाओं को कुशाग्र बुद्धि पर हावी होने का अधिकार कभी मत दो। अपने वजूद की तलाश खुद के अंदर करो और प्रभुत्व पाकर बेहतरीन शख़्सीयत का प्रमाण दो।

आत्मबल का एक गूढ़ स्त्रोत बहता है हमारे भीतर डर को जड़ से काटने पर फूट पड़ेगा सकारात्मकता का झरना। जो डर और जिजक की असंख्य परतों के पीछे बंदी पड़ा है। भावनाशील होना बुरा नहीं पर मूर्खता की दहलीज़ ना लाँघे एक सीमा तक सिमित रखें भावनाओं को बोल दो।

निडरता को सौंप दो अपना वजूद बस आँखें काफ़ी है। बात करते वक्त हर किसीसे मिलाना सिख लो एक व्यक्तित्व उभर आएगा अपने आप में आत्मविश्वास का ब्युगूल बजेगा।

मात खाना और हारना ज़िंदगी का हिस्सा सही पर उसे आदत बनाना खुद के प्रति अन्याय है। कमज़ोर खयालों को बंदीश में रखो अपने सपनों की ज़मीन पर कदम रखने की इज़ाज़त मत दो। ज़िंदगी में से अपने लिए आसमान चुनना है तो हिम्मत और हौसलों का दामन थामें नज़रों को लक्ष्य की सरहद पर तैनात करो और पीछे मूड़ कर देखने की आदत को बदल दो।

बस कुछ ही कदमों पर आपकी मंज़िल खड़ी है हर खुशीयों को आगोश में भर लो एक शिव संकल्प के साथ।

भावना ठाकर 'भावु' (बेंगुलूरु,कर्नाटक)