हम सभ भारतीय एक ही दिशा में एक एक कदम चलते हैं तो एक साथ 135 करोड़ कदम आगे बढ़ते हैं

गोंदिया - भारत के बड़े बुजुर्गों, बुद्धिजीवियों, कौशलता निपुण विद्वानों, कुछल नेतृत्व धारक मनीषियों के विचारों का अण्खुट खज़ाना है हमारे देश में, हालांकि इनकी वैचारिक शक्ति का प्रयोग और क्रियान्वयन भी संस्कारों की जननी भारतमाता के गोद में किया जाता है। परंतु वर्तमान समय में हमारे भारतवर्ष में जो एक विषय जोरों से चर्चा में है, उस पर बहुत गंभीरता से हर देशवासी को सकारात्मक सोचना होगा यह विषय है!! 135 करोड़ जनसंख्या के कार्यबल, बुद्धि कौशल और शुभ संकल्प का संपूर्ण क्षमता के साथ दोहन करना।...साथियों यह विषय अगर हर भारतीय नागरिक जिसमें राजनैतिक, शासन-प्रशासन, पक्ष विपक्ष, सभके समझ में आ गया है, उसका क्रियान्वयन पूर्ण स्केल के साथ करना शुरू हुआ तो दुनिया की कोई ताकत भारत को विश्व का सर्वश्रेष्ठ विकसित देश बनाने में नहीं रोक सकती!!! साथियों बात अगर हम कुछ अवधि से चर्चाओं में चल रहे विषय जनसंख्या नियंत्रण कानून की करें तो हालांकि नीतिगत फैसला अभी नहीं हुआ है। परंतु अभी ज़रूरत है वर्तमान ज़नसंख्या स्थिति को संज्ञान में लेकर उसके कार्यबल, बौद्धिक कौशलता का उपयोग करने के रणनीतिक रोडमैप बनाने की, क्योंकि भारत माता की मिट्टी के गुण इतने प्रभावी हैं कि यहां हर नागरिक में किसी न किसी कौशलता बुद्धिमता का गुण समाया हुआ है!! बस!! ज़रूरत है उसे तराशने की, उचित ट्रेनिंग देने की, जिसमें अगर हम सफ़ल हो जाते हैं तो रोज़गार मांगने वाला रोज़गार सृजन कर्ता बन जाएगा!! 135 करोड़ लोगों के हाथों में काम होगा तो हम भारतीय अर्थव्यवस्था को पांच क्या?? 25 ट्रिलियन डॉलर तक की अर्थव्यवस्था भी ले जाने की क्षमता रखते हैं!! साथियों अगर हम वैश्विक रचना पर नजर घूमांए तो हमारा एक राज्य यूपी, दुनिया के सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देशों के पांचवे देश के नम्बर में है, तो हम विचार करें कि, हमारे एक संयुक्त भारत में आज 28 राज्य और 9 केंद्रशासित प्रदेश हैं, तो हमसे बहुत छोटी जनसंख्या वाले देशों के नागरिकों के हाथ में काम है, और कौछलता है तथा उनका जीवन स्तर उच्चतर है, तो फिर भारत में तो अपेक्षाकृत अधिक बुद्धि कौशलता और कार्य करने की क्षमता और काबिलियत है!! बस ज़रूरत है उसे तराशने की जो काम राजनीतिक कौशल बुद्धि और वैचारिक एकता के मंत्र को अपनाने पर क्रियान्वयन होगा।...साथियों बात अगर हम 135 करोड़ साथियों के कार्यबल बुद्धि कौशलता के निखार की करें तो हालांकि अलग-अलगमंत्रालयों के तहत कार्य योजनाएं चलाई जा रही है। परंतु मेरा एक सुझाव है जिस तरह से सेनाओं के तीनों अंगों के लिए एक पीडीएफ पद का सृजन कर नियुक्ति की गई है ठीक उसी प्रकार 135 करोड़ जनसंख्या के लिए अलग-अलग राज्यों के कौशल विकास मंत्रालयों के तहत कार्यबल, बुद्धि कौछलता क्षमता का उपयोग करने बनाए गए अपने-अपने विभाग के रणनीतिक रोडमैप और केंद्रीय कौशल विकास मंत्रालय के कार्य की समीक्षा व नियंत्रण करने के लिए एक सूत्रीय पद याने एक विशेष मंत्रालय बनाकर यानें तालमेल के लिए उस मंत्रालय का सृजन कर माननीय पीएम के अंतर्गत दिया जाए तो इस कार्य में तीव्रता से वृद्धि होगी और हमारी 135 करोड़ जनसंख्या की कार्यक्षमता और उनकी कौछल क्षमता के दोहन का अभूतपूर्व विकास होगा और हम शीघ्र ही लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे और आत्मनिर्भर बहुत तेज़ी से बनेंगे। साथियों बात अगर हम केंद्रीय कौशल विकास व उद्यमिता मंत्रालय द्वारा 4 अक्टूबर 2021 को राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप मेले की करें तो, कौशल भारत मिशन, प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) और राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के सहयोग से देश भर में 400 से अधिक स्थानों पर एक दिवसीय राष्ट्रीय अपरेंटिसशिप मेला का आयोजन कर रहा है।...साथियों बात अगर हम जातिगत, राजनीतिक स्थिति आंदोलनों, आरक्षण की लड़ाई की करें तो मेरा मानना है कि अगर 135 करोड़ पूरी जनसंख्या को उनके कार्यबल और कौछलता का आभास करा कर उनको निख़ारा जाएगा और उनको यह एहसास कराकर सफ़लता की चाबी उनको दी गई, तो उपरोक्त सभी मामलों का अंत होने की भी संभावना है!! क्योंकि हर हाथ में रोज़गार होगा तो जातीयता, आरक्षण, राजनीति, नकारात्मकता की ओर किसी का ध्यान नहीं जाएगा!! हालांकि अगर हम इस मुद्दे को नकारात्मकता से संज्ञान में लेकर विश्लेषण करें तो नकारात्मक रिजल्ट ही निकलेगा।इसीलिए हमें इस विषय को सकारात्मकता से संज्ञान में लेने की ज़रूरत है।...साथियों बात अगर हम दिनांक 2 अक्टूबर 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा लाल किले से एक कार्यक्रम के संबोधन की करें तो पीआईबी के अनुसार उन्होंने भी 135 करोड़ जनसंख्या के बारे में कहा कि आज़ादी का अमृत महोत्सव भारत के उज्ज्वल भविष्य और विश्व में भारत को उन्नत स्थान दिलाने के लिए मन में आशा जगाने, संकल्प लेने और अपने कार्यों से इन आशाओं को पूरा करने का है। उन्होंने कहा कि भारत 130 करोड़ की आबादी वाला देश है और अगर सभी 130 करोड़ भारतीय आज़ादी के अमृत महोत्सव में एक-एक संकल्प लें तो एक बहुत बड़ी शक्ति बन जाएगी। अगर हम सब भारतीय एक ही दिशा में एक एक कदम चलते हैं, तो हम सब एक साथ 130 करोड़ कदम आगे बढ़ते हैं। ये हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि हम आज़ादी के अमृत महोत्सव को प्रेरणा का एक स्रोत व चेतना जागृत करने का माध्यम बनाकर भारत के विकास का राजमार्ग बनाएं। आज़ादी का अमृत महोत्सव 130 करोड़ भारतीयों के शुभ संकल्प लेने और उसे निभाने का वर्ष है और 130 करोड़ शुभ संकल्प का योग ही भारत को आत्मनिर्भर बना सकता है। उन्होंने कहा कि ये हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि आज़ादी के अमृत महोत्सव को प्रेरणा का एक स्रोत, चेतना जागृत का माध्यम और भारत के विकास का राजमार्ग बनाएं। हम सबको इस दिशा में काम करना चाहिए क्योंकि यह संकल्प लेने और उसे सिद्धि में परिवर्तित करने का समय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि अगर हम ये संकल्प लेकर अपने कार्यों से एक बार फिर स्वंय को भारत माता को समर्पित करें, तो आज़ादी के शताब्दी वर्ष में भारत निश्चित रूप से विश्व में एक बड़ी ताक़त बनकर उभरेगा। अतः अगर हम उपरोक्त विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि हम सब भारतीय एक ही दिशा में एक एक कदम चलते हैं तो हम सब एक साथ 135 करोड़ कदम आगे बढ़ते हैं, विश्व को भारत की 135 करोड़ जनसंख्या का बुद्धि कौशलता, कार्यबल, शुभ संकल्प दिखाने का समय आ गया है। 

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र