,,रात बरसात की और मौसम भी सुहाना है,,

रात है चांदनी कुछ

बात हो जाय • 

मुलाकात   दिल की

दिल से हो जाय ,

गुन्चा गुन्चा चमन का

अब महक जाए

सारे गुलशन में 

आज धूम हो जाय ,

बात कहना है जो 

कहो तुम भी ,

मेरा दिल मुरली की

तान हो जाय ,

अब ऐसे शर्माओ 

तुम हमसे ए जानां ,

मेरे चेहरे पर पलकों

की छओं हो जाय,

रात बरसात की और 

मौसम भी सुहाना है,

नशा बढ़ कर क्यों न,

मेरा सुरूर हो जाए ,

वो भी चुप हैं,

और मेरी भी जुबां 

बन्द मुश्ताक ,

वल्लाह आंखों आँखों 

से ही बात हो जाय ,,,,,,,,


डॉ. मुश्ताक़ अहमद  शाह

"सहज़" हरदा मध्यप्रदेश,