रिश्ते

किस पर करू भरोसा,

दुनिया की भीड़ में,

टूटा है दिल हमेशा।

दुनिया की भीड़ में।

रिश्तों का मान टूटा,

अपनों का साथ छूटा।

अपने हुए पराए,

दुनियां की भीड़ में।

सिक्कों की खनक में,

दुनिया की चमक में।

सब को भुला दिया,

दुनिया की भीड़ में।

भाई बहन हुए पराये,

मां बाप मन न भाएँ।

हर रिश्ता हुआ पराया,

दुनिया की भीड़ में।

जब आई घर मुसीबत,

जब सबकी पड़ी जरूरत।

अपनों को ढूंढ़ती निगाहें,

दुनियां की भीड़ में।

तोड़ो न दिल के रिश्ते,

प्यार की ये है किश्ते,

सबको गले लगा लो,

दुनिया की भीड़ में।।


शहनाज़ बानो,स०अ०,

उच्च प्राथमिक विद्यालय-भौंरी

चित्रकूट,उ०प्र०