गैस महंगाई की आग ने बुझा दिए `उज्ज्वला` के चूल्हे

कटरा बाजार /गोंडा। गरीब परिवारों को चूल्हे के धुएं से आजादी दिलाने वाली बड़ी स्कीम उज्ज्वला योजना प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। जिसके अन्तर्गत गरीब परिवारों को निशुल्क गैस कनेक्शन दे दिया गया लेकिन योजना पर महंगाई की मार पड़ने से 90℅ उपभोक्ता सिलेंडर नहीं भरवा पा रहे हैं. महंगाई और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने सरकार की धुआं मुक्त भारत की योजना को भी पलीता लगा दिया है।महिलाओं को धुएं से निजात दिलाने को उज्ज्वला योजना में दिए गए गैस सिलेंडर और चूल्हे की आग महंगाई में ठंडी पड़ गई है।

 गरीब परिवारों को निशुल्क सिलेंडर तो दे दिए गए, लेकिन गैस के दाम बढ़ने से लाभार्थी इन्हें रिफिल नहीं करा पा रहे हैं।जिससे महिलाओं के चौके में फिर से धुएं वाले चूल्हे की एंट्री हो गई है।दिनोंदिन गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमतों के कारण गरीब परिवार की महिलाओं ने उज्ज्वला में मिले गैस सिलिंडर के हाथ जोड़ लिए हैं। इसकी जगह थोड़ी सी मेहनत पर जंगलों से मुफ्त मिलने वाली लकड़ी के जरिए चूल्हों पर घर-घर खाना बनने लगा है। वही लाकडाउन के बाद चारो तरफ बढ़ते नदीयो के पानी ने भी बेरोजगारी को काफी बढ़ावा दिया।

कटरा बजार के वार्ड न. 4 मे अपने घर पर चूल्हे पर लकड़ी में खाना बना रहीं मिठलेश ने बताया कि उज्जवला योजना में गैस कनेक्शन मुफ्त मिला था, तब लगा कि अब धुएं से छुटकारा मिल गया।लेकिन इतनी महंगी गैस कौन भरा पायेगा इस लिए तीन महीना से खाली रखा है।  वही राजगढ़ गांव के रामावती ने बताया कि साहब गैस चूल्हा पाने के बाद धुएं से छुटकारा पावे का सपना पूरा होई गवा था लेकिन जब आंख खुली तो देखेन ऊ सपना रहा। अतनी महंगाई व बेरोजगारी के चलत कौन भरा पाई गैस साहब हमरे बस की बात नाही। राजगढ़ की बुधना ने बताया कि दो महीना होई गवा अभी तक गैस नाही भरायन का करी साहब इतना रुपया सिलिंडर पर खर्च नहीं कर सकित है चूल्हे पर लकड़ी में खाना बनाना बिल्कुल मुफ्त है। वही ठीक थोरे धुआं लागी फिर से बर्दाश्त कई लेब।