बिहार : मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के खाली पड़े बड़े पदों पर नियुक्ति का मामला फंसा, अभ्यर्थी परेशान

                                      

कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर राज्य के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के खाली पड़े बड़े पदों को भरना था। यह नियुक्ति बिहार तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से होनी थी पर अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी है। इससे अभ्यर्थी परेशान हैं। तकनीकी सेवा आयोग में अध्यक्ष का पद अगस्त से खाली पड़ा था। इसकी वजह से नियुक्ति प्रक्रिया रुक गयी थी। अब तकनीकी आयोग के नए अध्यक्ष की जिम्मेवारी बाला मुरुगुन डी को दी गयी है। उनके पास कई अन्य विभागों की भी जिम्मेवारी भी है। राज्य के मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिटी के तहत 3704 पदों पर नियुक्ति होनी थी। इसके अलावा मेडिकल ऑफिसर के 2632 पदों पर भी नियुक्ति होनी थी। साथ ही आईजीआईसी में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर की नियुक्ति होनी है।

इसमें एक पेंच फंस गया था सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति में रोस्टर के नियमों का पालन नहीं होता है। विभाग की ओर से इसमें संशोधन कर नहीं भेजा गया है। इसकी वजह से भी मामला अटका है। इसके अलावा यूनानी और आयुर्वेदिक कॉलेजों में भी डॉक्टरों की नियुक्ति होनी है। कुल मिलाकर देखा जाए तो दस हजार डॉक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया पर फिलहाल विराम लगा हुआ है। इसके अलावा फार्मासिस्ट, फिजियोथैरेपिस्ट, एक्सरे टेक्निशियन, फिशरीश ऑफिसर व इंस्पेक्टर के पदों पर भी बहाली होनी है। इसकी संख्या भी काफी अधिक है।

रिजल्ट अब तक नहीं

आयोग की सबसे पहली वैकेंसी जेई की निकाली गई थी। 6379 पदों के लिए नियुक्ति होनी थी। इन छात्रों की काउंसिलिंग भी करवायी गयी। काउंसिलिंग करवाने के बाद अभी तक फाइनल रिजल्ट जारी नहीं किया गया है।

अजय चौधरी (पूर्व अध्यक्ष, बिहार तकनीकी सेवा आयोग) ने कहा कि डॉक्टरों के सुपर स्पेशलिटी नियमावली में संशोधन किया जाना था। जिससे वैकेंसी विलंब हुई। मेरा टर्म भी पूरा हो गया था। हालांकि, पिछले कोरोना काल में पांच हजार डॉक्टरों की नियुक्ति आयोग की ओर से की गई। कुछ वैकेंसी रह गई थी।