श्रद्धा जरुरी है

आओ नमन करें

हम अपने पितरों को

आओ श्राद्ध से खुश करें

हम अपने पितरों को

जो कभी साथ हमारे थे

हमको बहुत ही प्यारे थे

दूर भले हमसे रहते हैं

आशीर्वाद वे हमको देते हैं

नहीं मांगते वे हमसे कुछ भी

प्रसन्न करें हम श्रद्धा से ही

जीव जंतुओं का ख्याल रखें

आओ अपने पितरों का सम्मान करें

दहलीज को हम यूं सजाते हैं

फूल उस पर बिखराते हैं

किस वक्त भ्रमण करने आ जाएं

कब हमारे लिए आशीर्वाद दे जाएं

माफी मांगे हम उनसे करबद्ध

कभी गलती हो जाती है भूलवश

पितरों की संतुष्टि जरूरी है

पितरों में श्रद्धा जरूरी है

वे कुछ नहीं हमसे ले जाते हैँ

कितना हमको वे दे जाते हैँ

मेरी रचनाएँ मेरे माता -पिता रूपी सास -ससुर के लिए समर्पित हैँ।

रितु शर्मा

दिल्ली