ग्लोकल विवि. में मनाया गया विश्व फार्मासिस्ट दिवस धूमधाम से मनाया

सहारनपुर। ग्लोकल स्कूल ऑफ़ फार्मेसी, ग्लोकल यूनिवर्सिटी में विश्व फार्मासिस्ट दिवस बहुत ही हर्षाेल्लास के  साथ मनाया गया। इस अवसर पर ग्लोकल स्कूल ऑफ़ फार्मेसी में रंगोली, पोस्टर, भाषण एवं भिन्न भिन्न प्रतियागिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरम्भ स्कूल ऑफ़ फार्मेसी के सभी विद्यार्थिओं एवं शिक्षक गण ने फार्मासिस्ट की शपथ के साथ किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन ग्लोकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ.सय्यद अखील अहमद ने द्वीप जलाकर किया। इस अवसर पर उन्होंने स्कूल ऑफ़ फार्मेसी के विधार्थियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाए दी। रंगोली में बी फार्मा प्रथम वर्ष की छात्रा कुमारी सदफ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, द्वितीय व तृतीय स्थान पर बी फार्मा प्रथम वर्ष के फ़रीन और शोयब रहे। पोस्टर प्रेजेंटेशन में प्रथम स्थान पर मोहम्मद शोयब मिर्ज़ा द्वितीय खलील नुरुद्दीन, त्रितय स्थान पर उस्मान रहे।

इस अवसर पर,ग्लोकल यूनिवर्सिटी के उप कुलपति डॉ सतीश कुमार शर्मा जी एवं हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट डॉ मोहम्मद आसिफ ने अतिथि मिस्टर अभिषेक रस्तोगी, हेड,विंडलास बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड, देहरादून  का स्वागत कियाद्य कार्यक्रम के दूसरे चरण में ग्लोकल यूनिवर्सिटी के उप कुलपति डॉक्टर सतीश कुमार शर्मा जी ने विद्यार्थियों को फार्मेसी क्षेत्र के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। उन्होंने बताया कि कैसे एक छात्र फार्मेसी करने के उपरांत अस्पताल में, अध्ययन में, दवाइयों के आयात और निर्यात में और नई दवाई की शोध में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकता है।

कार्यक्रम के दौरान स्पीकर मिस्टर अभिषेक रस्तोगी,  हेड,एफ एण्ड डी विंडलास बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड, देहरादून ने फार्मासिस्ट के महत्व पर प्रकाश डाला । उन्होंने यह भी बताया कि कैसे एक फार्मासिस्ट समाज के लिए महत्चपूर्ण है द्य इस अवसर पर उन्होंने समाज के लिए फार्मासिस्ट के योगदान को सराहा। इसके अंतर्गत उन्होंने फार्मास्यूटिकल उद्योगों की भी चर्चा की और फार्मास्यूटिकल उद्योगों में फार्मासिस्ट के योगदान को विस्तार पूर्वक समझाया।

कार्यक्रम के समापन मे ग्लोकल स्कूल ऑफ़ फार्मेसी के एसोसिएट प्रोफेसर  डा. अब्दुल हफीज ने सभी अतिथि, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों का विनम्रता के साथ धन्यवाद किया। कार्यक्रम के समापन में उन्होंने आयोजक पंकज कालिया, श्रीमती रूही नाज़ एवं सुश्री बलजिंदर कौर इत्यादि के भावी योगदान का भी उल्लेख किया।