प्रेम क्षणिक और, भूलना कितना दीर्घ"

"और हम बिक‌ गए"

मोल लिया उसने 

हमको,हमसे 

वो जो मुस्कुरा कर मिले

और हम बिक‌ गये।

अक्सर देखा है हमने,

 दुनिया के बाजार में।

प्रेम मुस्कान के भाव में ,

सीधा सादा सौदा होता है।

हां यह अलग बात है कि मीठे-मीठे ही सही पर 

हम ठग लिए जाते हैं।

दिल में हजारों दर्द लिए 

खुद को समझाते है

रही होगी कोई 

उसकी मजबूरी 

वरना ऐसे नहीं

 बनाता दूरी

आज सालों साल बीत जाते हैं यादें तो आती हैं पर 

वो नहीं आते हैं

 मीठी मीठी बातों से

 अक्सर हम ,लूट लिए जाते हैं।

मोल लिया उसने हमको हमसे ,

वह जो मुस्कुराकर मिले ,

और हम बिक गये।


मधुलिका राय, "मल्लिका"  

गाजीपुर (उत्तरप्रदेश)