क्या सच है

कोविड से लड़खड़ाई अर्थव्यवस्था ,तो क्या सरकार देशद्रोही।


अब्बाजान कहने से क्या साहेब के कुकर्म छिप जायेगे।


तालिबान क्रूर हम लिंचिंग के बाद भी संस्कारी -हे राम


अनिल त्रिपाठी