॥ राष्ट्रभाषा हिन्दी ॥

अज्ञानी समझकर अँगुली पकड़ता

ज्ञानी बना जग को दिखलाता

अ से ज्ञ तक का पाठ सिखलाता

हिन्दी राष्ट्रभाषा हिन्दुस्तान का कहलाता

माता जिनकी संस्कृत कूल से आती

हिन्दी हमारी मातृभाषा है कहलाती

लिये आँचल में शब्दों का   भंडार

गीत गजल छ्न्द से समृद्ध है परिवार

विचार अभिव्यक्ति की अद्भूभूत संसार

खुली है सबके लिये इनकी दरबार

अ से अमृत का ज्ञान है कराता

ज्ञ से ज्ञानी का रूप में संवारता

ककहरा सुन्दर  है मन को भाये

पहाड़ा हिसाब किताब समझाये

बावन शाब्दों का है बृहत परिवार

सबको गले लगाये दिखाता है प्यार

कहानी कहकर राह दिखलाये

गीत सुनाकर मन को बहलाये

रामायण गीता व वेद पुराण

हिन्दी संस्कृत है जग में महान

अन्ताक्षरी का खेल खेलाये

बच्चे भी आसानी से समझ जाये

हम हिन्दुस्तानी को है इनपर नाज

राष्ट्रभाषा हिन्दी भाषाओं का सरताज

अनेक आँचलिक भाषाओं की जननी

हिन्दी सिखा जग को है  समझानी

आओं राष्ट्रभक्तो करो इनका सम्मान

राष्ट्रभाषा हिन्दी है विश्व महान


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार