वेतन और काम से संतुष्टी

सुरक्षित नौकरी और समय पर सही वेतन यह सभी की चाहत और प्राथमिकता होती है। नौकरी में वेतन की स्थिति कर्मचारियों के मानसिक, शारिरिक,सामाजिक एवं आर्थिक स्तर को बहुत अधिक प्रभावित करती है। नौकरी में असुरक्षा जहां कर्मचारियों में भय का माहौल पैदा करने का कार्य करती है वहीं असुरक्षा के कारण पैदा हुये भय के कारण कर्मचारी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अर्थात्  कार्य के दौरान अपना शत प्रतिशत योगदान नहीं दे पाते हैं। अक्सर सरकारी कर्मचारी सुरक्षित नौकरी के कारण संतुष्ट महसूस करते हैं लेकिन वेतन के बारे में उनकी राय अधिकांशतया यह रहती है कि प्राइवेट सेक्टर से उनका वेतन कम है। वहीं देश में निजी कंपनीयों में कार्यरत कर्मचारी वेतन से ज्यादा सुरक्षित नौकरी (जॉब सिक्योरिटी) को लेकर चिंतित रहते हैं। हमारे यहां सामाजिक स्तर का मापदंड वेतन से ही समझा जाता है।जितना बड़ा वेतन उतनी बड़ी सामाजिक हैसियत या प्रतिष्ठा।इसीलिये जब एक कर्मचारी का वेतन उसके साथी से अधिक होता है तब उसकी खुशी कई गुना बढ़ जाती है। कोई कर्मचारी अपने साथी कर्मचारी के ज्यादा वेतन लेने से असंतुष्ट है तो यह बहुत कुछ उसकी मानसिकता पर भी निर्भर करता है कि इस विषय में उसका क्या दृष्टिकोण है। कम वेतन पाने वाला कर्मचारी अधिक मेहनत कर अपने 

वेतन में वृद्धि के लिये प्रयास करके अपनी आर्थिक और सामाजिक हैसियत बढ़ सकता है। वहीं कभी-कभी कम वेतन पाने वाला कर्मचारी हीन भावना से ग्रसित भी हो सकता है।और उसका प्रदर्शन पहले से खराब भी हो सकता है। यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि वेतन का संबंध सीधे तौर पर कर्मचारी के प्रदर्शन को उच्च स्तर का या निम्न स्तर का बनाने के लिये जिम्मेदार है।

यदि आप नियोक्ता हैं तो आपको कर्मचारिय़ों की संतुष्टि के स्तर का ध्यान रखना होगा।असंतुष्ट कर्मचारी से अच्छे परिणाम की उम्मीद नहीं करी जा सकती है। हो सकता है असंतुष्ट कर्मचारी   काम छोड़कर भी जा सकता है। असंतुष्ट कर्मचारी से टिकाऊपन की उम्मीद कम ही होती है। बेमन से करा गया कार्य अक्सर काम चलाऊ कार्य होता है। असंतुष्ट वेतन तथा काम  में असंतुष्टि की मात्रा वैसे तो प्रत्येक स्तर पर देखी जा सकती है लेकिन यह निचले स्तर पर अधिक दिखाई देती है। यदि हम दूसरों से अपने वेतन की तुलना करते हैं तब हमें उनके और अपने द्वारा करे जाने वाले कार्यों पर भी ध्यान देना होगा। वेतन एवं कार्य के साथ ही कार्यस्थल का वातावरण भी इन सभी बातों को प्रभावित करता है। कर्मचारी ऐसे माहौल में काम करने से अधिक संतुष्ट महसूस करते हैं जहां कार्यस्थल पर अनावश्यक दबाव का निर्माण ना करा जाता हो। यदि समय-समय पर कर्मचारियों को पदोन्नति के साथ वेतन में वृद्धि कर दी जाये भले ही इसके लिये उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारियां दे दी जाये तब भी कर्मचारी उसी कार्यालय में बने रहना अधिक पसंद करेगा।बड़ा हुआ वेतन और पदोन्नति मिलने की वजह से अधिकांश कर्मचारी अतिरिक्त जिम्मेदारी लेने के लिए खुशी खुशी तैयार हो जायेंगे। नियोक्ता को चाहिये कि काम के बटवारे के समय कर्मचारियों की पसंद और नापंसद का भी ध्यान रखें। इससे जहां उनमें आत्मसंतुष्टि का भाव जाग्रत होगा वहीं वह उच्च कोटी का प्रदर्शन भी करेंगे। कार्यालय प्रमुख को सर्वप्रथम कार्य से संबंधित कुछ नीतियों का निर्माण करना होगा इसके साथ ही गैर पेशेवर तरीके से दूरी बनाते हुए पेशेवर तरीका अपनाना होगा।कर्मचारियों के साथ मित्रवत व्यवहार रखते हुये प्रोफेशनल तथा व्यक्तिगत रिश्तों में सामंजस्य स्थापित करते हुये कार्यालय के कार्यों को प्राथमिकता देना होगा। कर्मचारियों की संतुष्टि के साथ ही स्वयं की संतुष्टि के महत्व को समझकर कार्य करना होगा। 


रमा निगम वरिष्ठ साहित्यकार 

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