बुरे वक्त का संहार

अंतर्मन का सूर्य उगेगा,तब बुरा वक़्त जल जायेगा।

जब साहस-संकल्प जगेगा,तब बुरा वक़्त ढल जायेगा।।


जीवन कितना तड़प रहा है,

जीवन कितना बिगड़ रहा है

जीवन कितना कलप रहा है,

जीवन कितना उखड़ रहा है


जब हर मन जयगान करेगा,तब बुरा वक़्त मिट जायेगा।

हर मन प्रभु गुणगान करेगा,तब बुरा वक़्त हट जायेगा।।



साँसें बेग़ानी लगती हैं,

आहें बेमानी लगती हैं

खुशियाँ अंजानी लगती हैं,

दुख की रजधानी लगती हैं


अंतर जब नव रंग भरेगा,तब बुरा वक़्त पिट जायेगा।

जब जीवन जयनाद करेगा,तब बुरा वक़्त छँट जायेगा।।


दर्द आज मुस्काता है नित,

पीर बढ़ाता जाता है नित

भय ने आकर सबको घेरा,

आतंकों से नाता है नित


अंतर्मन का सूर्य उगेगा,तब बुरा वक्त़ जल जायेगा।

जब हर मन संघर्ष करेगा,तब विजयगान मिल जायेगा।।


                 --प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे