दोहों में बेटियाँ

बेटी तो कोमल कली ,बेटी तो  तलवार !

बेटी सचमुच धैर्य है,बेटी तो अंगार !!


बेटी है संवेदना,बेटी है आवेश !

बेटी तो है लौह सम,बेटी भावावेश !!


बेटी कर्मठता लिये,रचे नवल अध्याय !

बेटी चोखे सार का,है हरदम अभिप्राय !!


बेटी में करुणा बसी,बेटी में है धर्म !

बेटी नित मां-बाप प्रति,करती पूरा कर्म !!


बेटी तो ममतामयी,पर वीरों की वीर !

हर लेती परिवार की,हो कैसी भी पीर !!


बेटी है मानो धरा,बेटी है आकाश !

बेटी के गुण को "शरद",समझे यह युग काश !!


बेटी सेवा,श्रम लिये,करती है उपकार !

बेटी से ही सृष्टि को,मिलता नव आकार !!


बेटी अनुसंधान है,बेटी है विज्ञान !

बेटी तो अध्यात्म है,बेटी है सत् ज्ञान !!


बेटी सूरज की किरण,बेटी है उजियार !

बेटी  शीतल चांदनी,परे करे अंधियार !!


बेटी बेटे से भली,है वह खिलती धूप !

परम शक्तियां आ गयीं,ले बेटी का रूप !!

 

           --प्रो.(डॉ)शरद नारायण खरे