फसल अवषेश प्रबन्धन कृषक जागरुकता विषय पर आयोजित हुई एक दिवसीय कृषक गोष्ठी

बहराइच । शासन एवं जिलाधिकारी डॉ दिनेश चन्द्र के निर्देश के क्रम में प्रमोशन आफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फार इन-सीटू मैनेजमेन्ट आफ क्राप रेजीड्यू योजनान्तर्गत फसल अवषेश प्रबन्धन कृषक जागरुकता विषयक एक दिवसीय जनपद स्तरीय गोष्ठी/प्रदर्शनी का आयोजन कलेक्ट्रेट में किया गया। इस अवसर पर सांसद बहराइच अक्षयबर लाल गोंड, अध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती मंजू सिंह, विधायक सदर श्रीमती अनुपमा जायसवाल, पयागपुर के सुभाष त्रिपाठी, बलहा की श्रीमती सरोज सोनकर, जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि करनवीर सिंह मौजूद रहे।

गोष्ठी/कार्यशाला में मौजूद सांसद बहराइच, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक सदर, पयागपुर, बलहा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा उपस्थित किसानों तथा कम्बाइन हार्वेस्टर मालिकों से फसल अवषेश प्रबन्धन के लिए कृषि यन्त्रों का उपयोग करने तथा पराली ने जलाने की अपील की गयी। गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चन्द्र ने जिले के किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को न जलाये बल्कि पराली के बेहतर प्रबन्धन का उपयोग भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में करें। डॉ. चन्द्र ने कम्बाइन हार्वेस्टर मालिकों को निर्देश दिया कि सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम का प्रयोग सुनिश्चित करे तथा उनके द्वारा जिस क्षेत्र में कटाई की जाय वहॉ यह भी सुनिश्चित करें कि उस क्षेत्र के कृषक पराली न जलाये।  

जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की कि कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का भरपूर लाभ उठाते हुए पराली के बेहतर प्रबन्धन हेतु अनुदान पर संयंत्र प्राप्त कर खेती के साथ-साथ फसल अवशेष का प्रबन्धन वैज्ञानिक ढंग से करें। उन्होंने बताया कि 16 ग्राम पंचायतों में 80 प्रतिशत अनुदान पर पराली प्रबन्धन के यन्त्र उपलब्ध कराये गये हैं। उन्होंने कहा कि जिले के अन्य किसान भी समिति का गठन कर अनुदान पर कृषि यन्त्र व ट्रैक्टर इत्यादि फार्म मशीनरी बैंक के अन्तर्गत प्राप्त कर सकते हैं। डीएम ने कृषि व राजस्व विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिया कि अपने-अपने क्षेत्रों में पराली जलाने से रोकने हेतु जागरूकता अभियान संचालित करायें। जिससे जनपद में पराली जलाने की घटना ने होने पाये।  

गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए उप निदेशक कृषि टी.पी. शाही द्वारा जनपद में गतवर्ष पराली जलाने की हुई घटनाओं तथा दोषियों के विरुद्ध की गयी एफआईआर एवं अर्थदण्ड वसूली के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी। उन्होंने बताया कि गतवर्ष प्रायः जागरूकता की कमी के कारण पराली जलाने की घटनाएं प्रकाश में आयी थी। विभाग द्वारा न्यायपंचायत स्तरीय कृषक जागरुकता गोष्ठियों के माध्यम से कृषकों को जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा कृषकों के आवा-जाही के प्रमुख स्थानों पर होर्डिंग्स तथा वालपेन्टिंग/वालराइटिंग के माध्यम से किसानोंं को पराली न जलाने तथा उक्त के सम्बन्ध में मा. एन.जी.टी. तथा शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।  

श्री शाही ने बताया कि विभाग द्वारा किसान गोष्ठियों, चौपालों तथा किसान मेलों में प्रोजेक्टर के माध्यम से पराली/फसल अवषेश प्रबन्धन यन्त्रों का प्रयोग, देय अनुदान तथा पराली जलाने से होने वाली हानियों के संबंध में वीडियो फिल्म के माध्यम से जानकारी प्रदान की जा रही है। गोष्ठी/कार्यशाला में मौजूद कृषि वैज्ञानिक डॉ. विनायक शाही, डॉ. शैलेन्द्र सिंह, डॉ. के.एम. सिंह, डॉ. विनय कुमार द्वारा फसल अवशेष प्रबन्धन, वेस्ट-डी कम्पोजर का प्रयोग कर पराली को खाद में परिवर्तित कर खेतों में मिलाकर उत्पादन बढ़ाने के तरीके बताये गये। गोष्ठी/कार्यशाला में उपस्थित प्रगतिशील कृषक रामफेर पाण्डेय व लालता प्रसाद गुप्ता ने किसानों के अपने अनुभव साझा करते हुए पराली न जलाने तथा उसके बेहतर प्रबन्धन के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिये। कृषक बाबादीन पटेल ने कृषको को अच्छे स्वास्थ्य के लिये जैविक खेती को अपनाने की सलाह दी गयी।

कलेक्ट्रट परिसर में फसल अवषेश/पराली प्रबन्धन (इन-सीटू) कृषि यन्त्रों की प्रदर्शनी का मा. जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी व अन्य अधिकारियों तथा मौजूद कृषकों के साथ अवलोकन किया गया। प्रदर्शनी के अवलोकन के दौरान अवर अभियन्ता कृषि नितिन मौर्य द्वारा प्रदर्शित किये गये कृषि विशेषकर पराली प्रबन्धन के लिए उपयोगी यन्त्रों के विशिष्टता के बारे में जानकारी प्रदान की गयी। इस अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर में पराली जलाने से होने वाले पर्यावर्णीय नुकसान के सम्बन्ध में किसानों को लोकगीत के माध्यम से जागरुक किया गया।

इस अवसर पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बलवन्त सिंह, जिला गन्नाधिकारी एस.के. मौर्य, एडीसीओ सहकारिता निरंजन प्रकाश, जिला उद्यान अधिकारी पारसनाथ, जिला कृषि अधिकारी सतीश कुमार पाण्डेय, जिला कृषि रक्षा अधिकारी आर.डी. वर्मा, सहायक निदेशक रेशम एस.बी. सिंह, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी उदय शंकर सिंह, मत्स्य निरीक्षक गनेश प्रसाद, उप दुग्धशाला विकास अधिकारी नत्थू सिंह, एडीओआईएसबी राम प्रसाद, बीडीओ रिसिया प्रहलाद कुमार वर्मा सहित अन्य अधिकारी, कृषक शशांक सिंह, बब्बन सिंह, देशराज पाण्डेय आदि सैकड़ों कृषक एवं कम्बाइन हार्वेस्टर मालिकान उपस्थित रहे।