स्मृति

स्मृति मे डूब गया मेरा मन।

मुझे याद आ गया वो मंज़र।

हम लौट रहे थे पिकनिक मनाकर।

मैंने देखा एक चिड़िया डाल पर।

नीड़ बना रही थी तिनका तिनका जोड़कर।

वह दृश्य था अति मनोरम।

संजो रही थी सपनो को सुध बुध बिसराकर।

सहसा एक हवा का झोंका आया तेज।

कर गया उसके सपनो को चूर।

तिनका तिनका गया बिखर।

हार नही मानी लाई तिनका एक एक कर।

अपना लक्ष्य साधा सुंदर नीड़ बनाकर।

उसके हौसले को देख मिली हमें एक सीख।

बाधाएं कितनी भी आए न मानो कभी हार।

धीरज धैर्य रखकर करो निरंतर प्रयास।

इरादे फौलाद है,हो जाएंगी मुश्किलें सब पार।

सपने सच होंगे जो तुममें है आस।


प्रियंका पांडेय त्रिपाठी

प्रयागराज उत्तर प्रदेश