जिंदगी की तलाश

भीड़ में खो गए, 

क्या से क्या हो गए, 

दिल को अब हो रहा,

कुछ खोने का एहसास, 

अब हम कर रहें, 

ज़िंदगी की तलाश।


सफर तय कर रहें, 

राह में चल रहें, 

तम को चीरकर,

कर रहें हम प्रकाश, 

क्योंकि हम कर रहें, 

ज़िन्दगी की तलाश।


गिर रहें संभल रहें,

चोट भी सह रहें,

तैरना आता नहीं, 

फिर भी नाव खे रहें, 

मिल जाएगा किनारा, 

है दिल को ये आस,

क्योंकि हम कर रहें, 

ज़िंदगी की तलाश। 


हम यूं भटक रहें, 

खुशी अपनी ढूंढ रहें,  

तूफ़ान के दौर पर भी, 

हौसलें से चल रहे, 

करते रहें हम प्रयास,  

क्योंकि हम कर रहें,

ज़िंदगी की तलाश।


ज़िंदगी की तलाश, 

ख़त्म होती नहीं कभी, 

चाह हर किसी की, 

पूरी होती नहीं कभी, 


सफर ज़िन्दगी का, 

ठहरता नहीं कभी, 

हैं खानाबदोश सब, 

आज यहां तो कल 

और हैं कहीं, 

ज़िन्दगी में ज़िन्दगी की तलाश, 

रुकती नहीं कभी।


 स्वरचित- अनामिका मिश्रा (लेखिका, कवयित्री) 

झारखंड सरायकेला (जमशेदपुर)