मै हिंदी हूं

हिंदी घबराई सकुचाई सी !

पहुंची भाषा के दरबार !

सभा लगी थी भाषाओं की !

हिंदी बिचारी खड़ी थी लाचार!


हिंदी को तन्हा खड़ा देख !

अन्य भाषाओं ने तंज कसा !

हिंदी तो टूटी-फूटी चरमराई है !

हिंदी बोलने मे शर्म आती है !

हिंदी तो गरीब असहाय की भाषा है !

हिंदी के विलुप्त होने की आशा है !


हां मै हिंदी हूं !

हिन्दुस्तान की हिंदी हूं !

सभी भाषाओं की जननी हूं !

तुम सब मे समाई हूं ! तुम्हारा वजूद हूं !

भारत की पहचान हूं !

हिंद के कण-कण मे मै हिंदी हूं !


मुझे गर्व है ! मै हिंदी हूं !

सरस्वती के झनकार मे मैं हिंदी हूं !

शिव के ओमकार मे मै हिंदी हूं!

ऋषियों की वाणी मे मै हिंदी हूं !

काव्य पुराण मे मै हिंदी हूं !

अज्ञानी को ज्ञानी बनाती हूं !

गरीबों के दिलों मे राज करती हूं !

भारत के मान सम्मान मे मै हिंदी हूं !


प्रियंका पांडेय त्रिपाठी

प्रयागराज उत्तर प्रदेश