महल अपनी ही गाते हैं

प्राचीन धरोहर अपनी 

व्यथा आज सच सुनाते हैं

अश्रु बहा कर अपनी दुर्दशा

गाकर सच सुनाते हैं।।


महल अपनी ही गाते हैं।।२।।


अपनी ओर सबका ध्यान खिंचवाते 

कहते खामोशियों से देखो हमें 

अपनी जरजर हालात दिखाते हैं।।

किसी को नहीं सुध हमारी देखो

 हम महल विलुप्त से नजर आते हैं।।


महल अपनी ही गाते हैं।।२।।


कविताओं, लोक गायनों मे हमें 

बढ़-चढ़ लिख, गाकर सभी सुनाते हैं

फिर क्यों नहीं फिक्र हमारे हालात की

हम मायूस नज़र नहीं आते हैं।।


देखो हमारी गौरवशाली दीवारों पर

प्रेम इजहार लिख गंदा कर जाते हैं

कहीं काई जमीं, कहीं दरार आई 

कोई सुद्ध हमारी नहीं ले जाते हैं।।


महल अपनी ही व्यथा सुनाते हैं।।२।।

महल अपनी ही गाते हैं।।२।।


वीना आडवानी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र